Morari Bapu Suvichar Images ( मोरारी बापू सुविचार इमेजेज  ) || Morari Bapu Quotes

Morari Bapu Suvichar Images ( मोरारी बापू सुविचार इमेजेज ) || Morari Bapu Quotes

Morari Bapu Suvichar Images in Hindi and English With Images ( मोरारी बापू सुविचार इमेजेज ). Morari Bapu Quotes and Thoughts with Photos.


Morari Bapu Quotes

जैसे अमरूद कोई रसमात्र नहीं है, गन्ना केवल नदी नहीं है, हनुमान जी केवल बन्दर नहीं है, ऐसे मेरे भाई बहन – अन्यदान केवल दान नहीं है, यह ब्रम्ह वितरण की प्रवति है।


Morari Bapu Quotes

किसी के यहाँ मेहमान – मन देख कर हुआ जाता है, माकन देख कर नहीं।

मोरारी बापू सुविचार


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इंसान की प्रवर्ति -परिणाम प्रवृति है। एक व्यक्ति को रोटी खिला दो तो उसके चेहरे की रौनक बदलेगी, एक परिणाम, वो तृप्त हुआ या नहीं हम तृप्त ज़रूर हो जायेंगे।


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प्रत्येक व्यक्ति अगर पांच – पांच व्यक्ति की मदद कर दे, तो ये बहुत बड़ा काम हो जाएगा। पर हम इतनी परतो से देखते है की हमें मदद के लिए कोई नहीं दिखता।


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लोग जब साधना को जीवन से बिलग करते है, जो मुझे बड़ा आश्चर्य होता है, साधना कोई बिलग वास्तु थोड़ी न है की एक झांटे करलो और बात ख़तम, जीवन ही साधना है, इस पक्ष में मैं हूँ।


अक्षय पत्र की सद्प्रवीति मानव जात की पूजा हैं। सेवा के माध्यम से ये एक पूजा है।

मोरारी बापू सुविचार


बुध पुरुष निदान करता है, बुद्धू निंदा करता है।


बहुत दूर तक जाना परता है, नज़दीक वालो को पहचानने के लिए।  मेरी राये यह है  की दुसरो को जानने की कसरत ही मत करो, जितना दुसरो को जानो गए राग देश बटेगा।


अति रौशनी आँखों को अँधा कर सकती है, अति जानकार होना ठीक नहीं है, थोड़ा अनपढ़ भी रहिये।


गंगा में अगर कोई मैले गंदे कपड़े पहन कर नहाने जाये, तो गन्दा पवित्र हो जाता है, गंगा अपवित्र नहीं होती है।


मन सुखी हो सकता है या दुखी हो सकता है, परन्तु मन प्रसन्न कभी नहीं हो सकता।


एक गुरु के बिना प्रसन्न होना असंभव है। अकारण कुछ किये बिना जब आप अचानक  प्रसन्न हो जायो तब याद करना उस गुरु को जिसने तुम्हारा स्मरण किया है।


चैतेनिक प्रसन्नता केवल गुरु प्रसार है, और कोई मार्ग नहीं।


प्रसन्न रहना है तो कभी किसी से इस्पर्धा मत करो, अपने आप अपनी गति करो प्रसन्न स्वयं हो जाओगे।


प्रसन्न रहना है तो वर्तमान में जेने की कोशिश करो, अभी आनंद में जिओ, वर्तमान में जिओ वो आदमी प्रसन्न रह सकता है।


प्रसन्न रहना है तो जितना हो सके हरी नाम का आश्रय करो।


सुबह का समय प्रकृति का स्वाद लेने का समय है, कभी जागते ही क्रोध मत करे चाहे कारण हो या नहीं।

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कुछ भी नहीं करना, हरी भजन है, कुछ भी करोगे तो बंधन आएगा।


जब भोजन करो तब कभी क्रोध मत करना, तुम्हारी थाली में जिसने भी परोसा है अन्य नहीं परोसा है उसने ब्रम्ह परोसा है।


घर से कही बहार जायो तो क्रोध करके बहार मत जाना मुस्कराकर जाना। और जब वापस घर आयो तो क्रोध भरे चित से मत आयो।


जब आखिर में कुछ भी नहीं करना है और अब सो ही जाना है तब क्रोध करके मत सो। सुर बन कर सो असुर बन कर नहीं, करण बन कर सो कुंभकरण बन कर नहीं।


अहिंसा ही परम धर्म है।


इर्षा जीव से होती है और निंदा जीभ से होती है।


निंदा वह ग्यारवा रस है जिससे कोई क्षेत्र मुक्त नहीं होता चाहे वह धर्म क्षेत्र क्यों न हो।


रात्रि में जो निद्रा से मुक्त हो जाये और दिन में जो निंदा से मुक्त हो। ऐसे बुध पुरुष के पैर पकड़ने में देर मत करना।

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आप के मन में जो अचानक पहला विचार आये, उसको करने में विलम्भ मत करना क्योकि वह विचार तुम्हारा नहीं किसी और ने तुम्हे दिया है।


कोई भी कवी जब एक कविता लिखता है तो पहली पंक्ति परमात्मा की होती है बाकी सब तुकबंदी होती है।


कोई दिन असाधारण न बनो असाधारण बीमारी है। साधारण स्वास्थ है।


साधगुरु साधारण होता है, साधारण में ही सहजता है।


बच्चे जितने ही साधारण होते है उतना ही प्यार आता है, बड़े जितने आसाधारण होते है प्रणाम करके चलना पड़ता है।


जिसको परमत्मा से प्रेम व महोबत है, उसके लिए मुक्ति कुछ नहीं।


आप रात्रि के पेहरि है मैं  दिन का पेहरि हु। आओ बाँट ले और 24 घंटे लोगो को जगाये रखे।


जिस पर पारात्मा की कृपा आने लगती है, भगवान उस पर शनै शनै धन कम कर देता है।


परात्मा को ध्यान में रख कर कोई कथा गाई जाए तब कथानानन्द और श्रवणानंद दोनों प्राप्त होता है।


मन को प्रसन्नता की इच्छा होती है, बुद्धि विवेक में श्रद्धा रखती है, चित एकाग्रता में रूचि रखता है और अहंकार मोच में रूचि रखता है। और आत्मा की भूख है आनंद।


एक शरण भी कर्म के बिना नहीं जाता।


परात्मा की इच्छा से ही कर्म होता है, और परात्मा की इच्छा से ही फल मिलता है, इससे ख़ुशी से स्वीकार करो।


वाणी की शुद्धि बहुत आवश्यक है।  सत्य भोलो तो भी प्रिय भोलो, कटु वचन के उसे कठोर मत बनाओ।

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तुम किसी पर करुणा करू तो ये भी सुन्दर होनी चाहिए आसुंदर नहीं।


वाद करो विवाद न रहो। दुर्वाद मत करो, किसका का अपवाद मत करो।  संवाद करो।


जो कार्य तुम्हे ईश्वर द्वारा दिया गया है उसे कर, पर परात्मा का स्मरण मत शूरना।


तेरे चाहने वाले काम नहीं होंगे तेरी महफिल में हम नहीं होंगे।


कभी साधु संत की निन्दा मत करना, ये उनका कर्तव्य है कि ये अपना वेश कैसे करे, परन्तु आपका ये नहीं कि आप उनकी आलोचना करे।


एक विद्यावान के मुख से कथा आपको समझ आएगी लेकिन आपके हृदय से टकराकर चली जाएगी, एक साधु के मुख से कथा आपके मन और हृदय दिनों में समा जाएगी।


गुरु से उपर कोई तत्व्य नहीं। और मौन गुरु वायु रूपी होता है।

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गुरु की कृपा से ईश्वर के रहस्य जाने जाते है परन्तु गुरु के रहस्य जाना बहुत मुश्किल है।


संसार का जो सार समझा दे वो गुरु है, नकी जो इस संसार से मुक्त कराए।


भजन ही भक्ति के भाव महल में भोग करने का तरीका है।


मानुष के जीवित होने से बड़ा चमत्कार कहा दिखेगा।


कर्म ही भोग की स्थापना है, कर्म से मुक्ति कभी नहीं मिल सकती।


हार्दिक सत्य बौद्धिक सत्य से ज़्यादा महत्त्व है।


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